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संविधान के मौलिक अधिकार

* भारत में  मूल अधिकारों की मांग सर्वप्रथम, संविधान विधेयक 1895 के माध्यम से की गई.
* भारतीय संविधान में इस संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिया गया है.
* भारतीय संविधान के भाग-3 में इसे शामिल किया गया है. (अनु-12 से अनु-35 तक).
* 1917 & 1919 के दौरान कांग्रेस ने  संकल्प पारित करके मौलिक अधिकारों की मांग की थी.
* कांग्रेस ने अपने कराची अधिवेशन (1931) में मूल अधिकारों का प्रस्ताव पारित किया था.
* मूल अधिकारों की कुल संख्या पूर्व में 7 थी जो कि वर्तमान में 6 है संपत्ति के अधिकार को  1979 में 44वे संशोधन द्वारा हटा दिया गया है.


1) समता का अधिकार (अनु- 14 से 18)
अनुच्छेद-14 : विधि के समक्ष समता  या विधियों के सामान संरक्षण का अधिकार.
अनुच्छेद-15 : धर्म , मूलवंश, जाति, लिंग, या जन्मस्थान, के आधार पर विभेद का प्रतिषेध 
अनुच्छेद-16 : लोक नियोजन के विषय में अवसर कि समानता.
अनुच्छेद-17 : अस्पृश्यता का अंत.
अनुच्छेद-18 : उपाधियों का अंत 

2) स्वतंत्रता का अधिकार (अनु- 19 से 22)
अनुच्छेद-19 : वाक् स्वातंत्र्य विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण .
अनुच्छेद-20 : अपराधो के लिए दोषसिद्धि के सम्बन्ध में संरक्षण .
अनुच्छेद-21 : प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण .
अनुच्छेद-22 : कुछ दशाओं में गिरफ़्तारी और निरोध से संरक्षण.

 3) शोषण के विरुध्द अधिकार (अनु- 23 से 24)
अनुच्छेद-23 : मानव के दुर्व्यापार और बलात श्रम पर रोक.
अनुच्छेद-24 : कारखानों आदि में बालको के नियोजन का प्रतिषेध .


4) धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनु- 25 से 28)
अनुच्छेद-25 : अन्तःकरण की स्वतंत्रता और धर्म के अबाध रूप में मानने और प्रचार करने की स्वतंत्रता.
अनुच्छेद-26 : धार्मिक कार्यो के प्रबंध की स्वतंत्रता.
अनुच्छेद-27 : किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करों के संदाय के बारे में स्वतंत्रता.
अनुच्छेद-28 : कुछ शिक्षा संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने की स्वतंत्रता.


5) संस्कृति और शिक्षा सम्बन्धी अधिकार (अनु- 29 से 31)
अनुच्छेद-29 : अल्पसंख्यक वर्गों के हितो का संरक्षण.
अनुच्छेद-30 : अल्पसंख्यको को शिक्षा संस्थानों की स्थापना और उनके प्रशासन का अधिकार.
अनुच्छेद-31 : 1978 संपत्ति की इस अधिकार का विलोपन कर दिया गया है...

 
6) संविधानिक उपचारों का अधिकार (अनु- 32 से 35)
अनुच्छेद-32 : मौलिक अधिकारों को न्यायलय में प्रवर्तित कराने का अधिकार. इसके तहत न्यायलय 5 प्रकार की रिट जारी कर सकता है.
अनुच्छेद-33 : संसद द्वारा मूल अधिकारों के उपांतरण की शक्ति .
अनुच्छेद-34 : संसद विधि द्वारा मार्शल लॉ के प्रवर्तन के दौरान मूल अधिकारों के उल्लंघन की छतिपूर्ति .

3 comments:

  1. thanks my dear you give me a lote of data

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  2. Anonymous23:38

    लाभप्रद और संक्षिप्त जानकारी है धन्यवाद

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  3. Anonymous23:53

    Thanks 4u..

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